Tuesday, July 06, 2010

ज़िन्दगी भी न जाने कितने रंग दिखाएगी,
किस किस घाट ,किस किस जगह का पानी पिलाएगी

एक रंग हो जीवन का तो समझ भी लो ॥
हर पल बदलती ज़िन्दगी को कैसे समझें

यहाँ पल में क्या हो जाये , कुछ कहा नहीं जाता...
अभी हंसह रहे हैं , कब रोना पद जाये कहा नहीं जाता...

जीवन एक सफ़र है सुना था ,
उतार चदाव होंगे इसका भी एहसास था हमें।
लेकिन इस तरह यह जंग लड़नी होगी इसका गुमान न था...
सरहद पे लड़ते सिपाही सहीद तो कहलाते हैं
उनके सम्मान में लोग सर तो झुकाते हैं
ऐसे भी किस्मत नहीं हैं हमारी...
यह ज़िन्दगी की जंग लड़नी भी होगी और वोह भी अकेले ही.....

No comments: